मज़ाक़ बनाते नहीं, ख़ुद बनते ये नेता

ज़ुबान ज़रा सी फिसली और अर्थ का अनर्थ हो जाता है। कभी-कभी ये जाने-अनजाने हो जाये तो फिर भी समझा जा सकता है, पर आजकल राजनीति में इसकी मनमुताबिक आजमाइश ज़ोर-शोर से हो रही है। जबसे बरसों से जमी-जमाई राजनीति की दुकान पर पब्लिक ने ताला सा जड़ दिया है, हर दूसरे राजनेता ने अपनी ढफली अपना राग बजाना शुरू कर दिया है यहाँ अपने को मार्केट में बनाये रखने की ख़ातिर। बेहद आसान है, सरकार के विरोध करने के लिये बस कुछ ना कुछ अनर्गल कहना । इसी का…

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स्वर्णाभूषणों के नये मानक : Menē

पूरब के 3 billion लोगों की दुनिया में आभूषण के मायने आज भी वही है जो 6000 साल पहले था : आभूषण शुद्ध 24 कैरेट सोना हो। आभूषण का दाम निर्धारित हो उसके वज़न और उस दिन के सोने के भाव को गुणा करके। आभूषण को बनाने का तरीक़ा पारदर्शी और कम से कम फ़ीस राशि हो। आभूषण बेचा या बदला जा सके उतनी ही आसानी से,जितनी आसानी से ख़रीदते हैं। पश्चिमी दुनिया में आभूषण ख़रीदते वक़्त हम पाते हैं : ज्वैलरी में जब ‘फ़ाइन’ का तमग़ा लग जाता है,तब…

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