मन की बात – देश से सीधा संवाद

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जब से देश में भाजपा की सरकार आई है ‘मन की बात’ ने हमारे जीवन में अलग सा स्थान बना लिया है। उससे पहले राजनीतिक दलों ने जनता के “मन की बात” सुननी तो दूर, कभी अपने “मन की बात” तक नहीं सुनी। आज तमाम दलों की जो दुर्गति हो रही है,जनता उनसे कोसों दूर भाग रही है.. उसके जड़ में यही “मन की बात” है। कभी तो थाह ली होती कि जनता चाहती क्या है ? किन परेशानियों से जुझ रही है? पर नहीं..सब ने अपनी अलग “बुद्धिजीवियों “के ज्ञान से रोशन दुनिया बना ली,जिसमें गोरखधंधों में लिप्त मंत्री-संतरी और कालेधन की बहती धारा में हाथ धोते लोग.. अब भला इन्हें क्या पड़ी थी कि लोगों के “मन की बात” सुनते।

हर काली रात के बाद सुबह होती है.. लोगों ने पहली बार जाति-धर्म से उपर उठकर, अपने “मन की बात” सुनी और इन्हें दरकिनार कर नई राह दिखाती उत्साह से लबरेज़ एक ऐसे सशक्त नेतृत्व को चुना जो महज़ कहने में नहीं कर दिखाने में यक़ीन रखते हैं। मोदीजी के रूप में भारत ने एक ऐसे नेता को चुना जो लोगों के “मन की बात ” सुनते ही नहीं ..बल्कि उन पर अमल भी करते हैं।जनमत भी उनसे जुड़ता चला गया और वो बेहद लोकप्रिय जननेता बन गये। भारत को उसकी समृद्ध संस्कृति से जोड़ने वाले नेता ने सबसे पहले जनता से सीधे तौर पर जुड़ना पसंद किया। “योग” को विश्व पटल पर यथोचित सम्मान दिलवाया।योग की ही एक सिद्धी है मन: शक्ति योग..इसकी साधना करने से व्यक्ति दूसरों के मन की बात अक्षरश: जान सकता है। पर “अस्त-व्यस्त ‘ व ” मौक़ापरस्त ” लोग इस सिद्धी को प्राप्त करने में विफल रहते हैं.. सो कोशिश भी ना करें।

हमारे प्रधानसेवक जी ने हर उस मुद्दे पर “मन की बात” जानने की कोशिश की है और अपने “मन की बात “बताई है जो रोज़मर्रा के जीवन की बातें हैं। हमारे बच्चों के परीक्षा के समय , उनको मार्गदर्शक बन सही सलाह दिया तो हमें भी बच्चों पर अपनी आकांक्षाओं का बोझ लादने से रोका। किसानों के मित्र बन उनकी परेशानियों को जाना और कई नई योजनाओं के सूत्रपात से उन्हें अवगत कराया। गरमियों में प्यासे पशु-पक्षियों के लिये पानी की उपलब्धता को प्रेरित किया। देश में व्याप्त कालाधन को रोकने के उनके कठोर प्रयास .. देश को स्वच्छ बनाने की उनकी मुहिम पर कई अनूठे विचार..सोलर चरख़ा व खादी के कामयाब प्रयोग की बातें..नशे के दलदल में फँसे युवाओं को मुख्यधारा में लाने की कोशिश..लगभग हर विषय पर “मन की बात” साझा की ।

बकौल उनके “मन की बात”-

“बचपन से मैं एक बात सुनते आया हूँ और शायद वही “मन की बात” की प्रेरणा है। हम बचपन से सुनते आये हैं कि दुःख बांटने से कम होता है और सुख बांटने से बढ़ता है। “मन की बात” में, मैं कभी दुःख भी बांटता हूँ , कभी सुख भी बांटता हूँ। मैं जो बातें करता हूँ वो मेरे मन में कुछ पीड़ाएं होती हैं उसको आपके बीच में प्रकट करके अपने मन को हल्का करता हूँ और कभी कभी सुख की कुछ बातें हैं जो आप के बीच बांटकर के मैं उस खुशी को चौगुना करता हूँ”

आज देश में हमारे प्रधानसेवक के प्रति लोगों का अटूट प्रेम व विश्वास क़ायम हो पाया है इस “मन की बात” के कारण। लोगों में यह विश्वास की भावना घर कर गई है कि उनकी समस्याओं का निदान करने वाला कोई जननेता तो है।समय-समय पर हमने देखा है कि तमाम व्यस्तताओं के बावजूद किसी की मदद की क्षीण गुहार सुनते ही हमारे प्रधानसेवक उनकी त्वरित सहायता करते हैं। प्रतिद्वंद्वी दल साम-दाम-दंड-भेद लगाकर सत्ता हासिल करना चाहते हैं,पर उनको शायद पता ही नहीं कि यहाँ हमारे प्रधानसेवक जी ने “मन” की सुनी,”मन” से सुनी और भारतवर्ष के जन-जन का “मन” ही जीत लिया है.. “मन” को हरने वाले का कोई दूर-दूर तक प्रतिस्पर्धी नहीं होता। आप यूँ ही “मन की बात” करते रहें व हमारे मन की थाह भी लेते रहें,ये अवाम के “मन की बात” है।

जया रंजन

@JayaRjs

 

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One Thought to “मन की बात – देश से सीधा संवाद”

  1. Kashyap

    आप ने ना सिर्फ मेरे लेकिन पूरे देश के मान की बात बता दी जयाजी

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